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बीज गुणवत्ता परीक्षण

चना की अधिक उत्पादकता एवं अच्छी फसल हेतु बीज की गुणवत्ता अति महत्वपूर्ण है। बीज की गुणवत्ता परखने हेतु उसकी आनुवांशिक एवं भौतिक शुद्धता जाँच ले। गुणवत्ता युक्त बीज की जमाव क्षमता 90-95 प्रतिशत हों, रोग एवं कीट मुक्त हो तथा भौतिक रूप से कटा नहीं होना चाहिए। ज्यादा समय तक एवं गलत तरीके से भण्डारण किए हुए बीज की जमाव क्षमता कम हो जाती है। इसी तरह अधिक नमी एवं तापक्रम पर बीज भण्डारण करने पर भी उसकी जीवन क्षमता कम हो जाती है। साधारणतया, मोटे दाने वाली चना जैसे- काबुली चना के बीज का भण्डारण एक वर्ष से अधिक समय तक करने पर उसकी जमाव क्षमता कम हो जाती है। किसी भी प्रजाति का अनावश्यक बड़ा एवं बहुत ही छोटा बीज भी प्रयोग में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से भी अंकुरण क्षमता एवं बीज ओज में कमी आ जाती है। बीज अंकुरण एवं पौधे आबादी प्रबन्धन मुख्य रूप से बीज की गुणवत्ता, बुवाई की गहराई, मृदा नमी, मृदा तापमान, मृदा उर्वरता, मृदा गुणवत्ता या स्वास्थ्य, बीज सत्व इत्यादि कारकों द्वारा प्रभावित होता है।

बीज शोधन

बीज जनित रोगों से बचाव हेतु फफूँदनाशक द्वारा बीजोपचार अति आवश्यक है। चना को उकठा एवं जड़ गलन बीमारी से बचाव के लिए 2.0 ग्राम थीरम + 1.0 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति कि.ग्रा. बीज अथवा 3.0 ग्राम थीरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से संशोधन करना  आवश्यक है। ट्रा्रइकोडर्मा द्वारा 5.0 ग्रा./किग्रा. बीज की दर से संशोधन करने की संस्तुति की जाती है।
दलहनी फसलों में जड़ ग्रन्थियों की संख्या बढ़ाने एवं नत्रजन स्थिरीकरण बढ़ाने हेतु उचित राइजोबियम नस्ल द्वारा बीजोपचार करना चाहिए। 200 ग्राम राइजोबियम कल्चर प्रति 10 कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करना चाहिए। 50 ग्राम गुड़ अथवा चीनी को आधा लीटर पानी में घोलकर, गर्म करके ठण्डा करें एवं थोडा गोंद (2 मि.ली.) भी मिलाएं।
 इसमें राइजोबियम कल्चर (250 ग्राम) को अच्छी तरह मिलाकर बीज की संस्तुत मात्रा (10 कि.ग्रा.) डालकर घोल में मिला देना चाहिए। राइजोबियम कल्चर बीज की सतह पर अच्छी तरह चिपक जाना चाहिए। इस प्रकार उपचारित बीजों को कुछ देर तक छाया में सुखा लेना चाहिए। ध्यान रहे कि राइजोबियम से बीजोपचार के बाद कवकनाशी से बीज शोधन न करें।