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 चना का भारतीय भोजन में प्रयोग 

भारत में शाकाहारी मनुष्यों के भोजन में चना का स्थान प्रोटीन प्रदान करने वाले एक प्रमुख स्श्रोत के रूप में है। चना का मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ टिकाऊ खेती में भी महत्वपर्ण स्थान है। चना का उपयोग कई तरह से किया जाता है। जैसे-हरी पत्तियाँ एवं कोमल शाखाएँ हरी सब्जी के रूप में प्रयोग में लाई जाती है। कच्चे बीज या दाने सलाद या सब्जी के रूप में, इसी तरह पके हुए दाने को दाल बनाने, भुना हुआ दाना बनानें इत्यादि प्रयोग में लाया जाता है। चना के आटे का बेसन बनाकर कई तरह की मिठाईयाँ एवं विभिन्न प्रकार की नमकीन बनाने में प्रयुक्त होता है। चना की पत्तियाँ, तना एवं चारा पशुओं को खिलाने के काम में लिया जाता है। चना का चारा प्रोटीन युक्त होता है एवं स्वादिष्ट होता है इसी कारण इसे पशु बड़े चाव से खाते है।

पोषक गुणवत्ता

चना के दानें प्रोटीन एवं कार्बोहाड्रेट का एक अच्छा स्रोत है। चना के दानों में सल्फर युक्त अमिनों अम्ल के अलावा सभी आवश्यक अमीनों अम्लों की मात्रा बहुतायत में पाई जाती है। चना का मुख्य संग्राही कार्बोहाइड्रेट स्टार्च है, तत्पश्चात् आहार रेशा, ओलिगोसेकेराइड एवं सामान्य शर्करा जैसे ग्लूकोज एवं सुक्रोज पाई जाती है। लिपिड कम मात्रा में पाए जाते है। परन्तु पोषक के लिए महत्वपूर्ण असंतृप्त वसा अम्ल (लिनोलिक एवं ऑलिक अम्ल) बहुतायत में पाया जाता है। चना के तेल में बीटा-सीटोस्टीरॉल, केम्पेस्टीरॉल एवं स्टिग्मास्टीरॉल इत्यादि महत्वपूर्ण स्टीरॉल पाए जाते है। चना के दाने में कैल्सियम, मैग्निशियम, फॉस्फोरस एंव पोटाश भी जाया जाता है। कुछ महत्वपूर्ण विटामिन जैसे राइबोफ्लेविन, नियासिन, थायमिन, फोलेट, बीटा केरोटीन (विटामिन “ए”) इत्यादि का भी अच्छा स्रोत है। 

अंकुरित चना खाने से विटामिन सी, विटामिन ई तथा लौह तत्व प्राप्त होतें है जो स्वास्थ्य के लिए लाभ प्रद है।

तालिका-1ः चना के 100 ग्राम शुष्क दाने में उपलब्ध पोषक तत्व

चना
प्रोटीन 17-22
कार्बोहाइड्रेट 63
वसा 4.5
कैल्शियम   110                    
फास्फोरस   880
पोटेशियम 390
लौह 6
विटामिन बी1 0.34
विटामिन बी1 0.22