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अरहर की फसल  
अरहर भारत की महत्वपूर्ण दलहनी फसल है तथा क्षेत्रफल और उत्पादन के आधार पर चना के बाद इसका दूसरा स्थान है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक व तमिलनाडु भारत के प्रमुख अरहर उत्पादक राज्य हैं। यह पूरे उष्ण कटिबन्धीय, अर्द्वशीतोष्ण, तथा समशीतोष्ण क्षेत्रों में 300 उत्तर से 300 दक्षिण तक उगाई जाती है।

अरहर का पौधा 

अरहर का पौधा स्वपरागित अथवा परपरागित दोनों हो सकता है। स्वपरागण फूल के खुलने से पहले कली में ही हो जाता है। परपरागण मधुमक्खियों के द्वारा होता है। परपरागण 3 से 26 प्रतिशत तक हो सकता है जो कि अरहर की प्रजाति और स्थान पर निर्भर करता है।
अरहर में मूसला जड़ें पायी जाती हैं जो सीमित नमी की दशा में भी फसल की बढ़वार को बनाये रखती है। इस प्रकार की जड़ें मृदा के रासायनिक और जैविक दशाओं में सुधार लाकर उर्वरा शक्ति को बनाये रखने तथा सुधारने में सहायक होती हैं। दलहनी फसल होने के कारण अरहर सहजीवी विधि के द्वारा नत्रजन की अपनी आवश्यकता तो पूरी कर लेती है तथा लगभग 40 कि.ग्रा./हे. की दर से नत्रजन को भूमि में जमा भी करती है। इसकी पत्तियाँ झड़कर मिट्टी में मिल जाती हैं और सड़ने के उपरान्त मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि करती हैं।