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आल्टरनेरिया झुलसा
आल्टरनेरिया झुलसा रोग भी फसल को अधिक हानि पहुंचाने की क्षमता रखता है परन्तु इस रोग की व्यापकता अधिक नहीं है। इस रोग का संक्रमण विशेष वातावरणीय स्थिति में ही देखा जाता है सम्भवतः यह रोग सभी क्षेत्रों में देखा जाता है परन्तु इसकी व्यापकता आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है। यह रोग कवक आल्टरनेरिया प्रजाति द्वारा होता है। 

यह रोग कवक आल्टरनेरिया प्रजाति द्वारा होता है। 

रोग के लक्षण
रोग के प्रारंभिक अवस्था में पौधे की पत्तियों में भूरा एवं काले रंग के छल्लेदार धब्बे बनते दिखाई देते हैं। जो कि धीरे-धीरे पत्ती के समूचे हिस्से में फैल जाता है। जिसके फलरूवरूप पत्तियाँ सूख कर गिर जाती है। इस रोग का प्रकोप सामान्यतयाः गर्म एवं आर्द्र मौसम में अधिक होता है। यह एक बीज जनित रोग है। रोग की उग्र अवस्था में इसके लक्षण पौधों के अन्य भागों जैसे तने एवं शाखाओं पर भी दिखाई देते हैं।

प्रबन्धन

  • फसल की समय से बुवाई करनी चाहिए।
  • स्वस्थ बीज का चयन करना चाहिए।
  • रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का चयन करना चाहिए।
  • फसल में रोग का लक्षण दिखाई देने पर मेंकोजेब (डाईथेन एम-45) का (2.5 ग्राम/ली. पानी) का 10- 15 दिन के अन्तराल पर 1-2 बार छिड़काव करना चाहिए।