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पीला चितेरी रोग (येलो मोजेक रोग)
यह रोग मूँगबीन पीली चितेरी विषाणु द्वारा होता है जो कि एक सफेद मक्खी बेमिसिया टेबासाई नामक कीट के द्वारा फैलता है।

लक्षण
इस रोग के प्रारम्भिक लक्षण पत्तियों पर पीले चितकबरे धब्बे दिखाई पड़ते हैं। यह धब्बे अनुकूल परिस्थितियों में एक साथ मिलकर तेजी से फैलते हैं, जिससे पत्तियों पर बड़े-बड़े पीले धब्बे बन जाते है। फलस्वरूप कभी-कभी पत्तियाँ पूर्णतयाः पीली हो जाती हैं। पीली पत्तियों पर ऊतकक्षय भी दिखाई देता है। रोग का प्रकोप सामान्यतः फसल के विकास के मध्यक्रम अवस्था में ज्यादा होता है जब पौधा वृद्धि करने की अवस्था में रहता है। 

प्रबन्धन

  • जिस खेत में अरहर की बुवाई हो उसमें खरपतपार नहीं होना चाहिए। 
  • रोगग्रसित पौधों को शुरू में ही उखाड़ का नष्ट कर देना चाहिए।
  • फसल का सही तरह से रख रखाव एवं निगरानी करना चाहिए।
  • चूंकि यह रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलता है अतः इसके नियंत्रण के लिए खेत में रोग के लक्षण दिखते ही मेटासिस्टाक्स (0.1 प्रतिशत) का 10- 15 दिनों के अन्तराल पर 2-3 बार छिड़काव करना चाहिए।