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मसूर का भारतीय भोजन में महत्व 
भारत में मसूर के दानों का प्रयोग विशेष रूप से दाल के रूप में किया जाता है। इसके अलावा इसके दानों को नमकीन तथा दालमोठ के रूप में भी किया जाता है। शाकाहारी भोजन में मसूर का महत्वपूर्ण स्थान है। मसूर प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, रेशा, फास्फोरस, लौहतत्व, जिंक, केरोटीन, विटामिन और एंटीओक्सीडेटों का प्रमुख स्रोत हैं। गुणवत्ता के आधार पर मसूर के भूसे की पाचन योग्यता तथा प्रोटीन, कैल्शियम एवं फास्फोरस की मात्रा गेंहूॅ के भूसे की अपेक्षा अधिक होती है।  भारत में लाल दाने वाली मसूर प्रचलित है।

 

मसूर में उपलब्ध पोषक तत्वः
1. प्रोटीनः (ग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 22-25
2. कार्बोहाइड्रेटः (ग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 60-61 
3. वसाः (ग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 1.8-2.0
4. कैल्शियमः (मिग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 65-70
5. पोटेशियमः (मिग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 600-650
6. फास्फोरसः (मिग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 280-290
7. लौहः (मिग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 6-7
8. विटामिन बी1ः (मिग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 0.3-0.4
9. विटामिन बी2ः (मिग्रा. प्रति 100 ग्रा. दाना)- 0.15-0.20