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मटर (पाइसम सटाइवम) का दलहनी फसलों में विशेष स्थान है। भारत में इसके अंतर्गत 9-10 लाख हे0 क्षेत्रफल है। जिससे 9 लाख टन उत्पादन होता है। इसके अतिरिक्त इसकी औसत उपज भी निरन्तर बढ़कर वर्तमान में लगभग 1.0 टन/हे0 तक पहुँच गयी है। मटर की खेती करने वाले मुख्य राज्यों में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश प्रमुख हैं जो कुल उपज का 75 प्रतिशत योगदान करते हैं। इसके अतिरिक्त बिहार, असम, महाराष्ट्र, झारखण्ड व उड़ीसा राज्यों में भी इसका उत्पादन होता हैं। भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार की मटर उत्पादित की जाती है-पहली, जो अपरिपक्व अवस्था में मीठी स्वाद वाली तथा परिपक्व अवस्था में झुर्रीदार हो जाती है। दूसरी जो परिपक्व अवस्था में भी सफेद व पूर्णतः गोल दानों वाली होती है तथा पहले की अपेक्षा कम मीठी होती है। दूसरी प्रकार की मटर के दानों का चाट, छोला, दाल, बेसन व दूसरे स्वादिष्ट व्यंजनों में महत्वपूर्ण रूप से प्रयोग होता है। सूखे मटर का आटा केवल प्रोटीन स्रोत के रूप में ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कुछ खाद्य उद्योगों में इसे थिकनिंग एजेन्ट हेतु भी प्रयोग किया जाता है। हरी मटर को ताजा अथवा डिब्बाबंद सब्जी के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। अत्यधिक पोषकता तथा इसकी सस्ती के कारण उपलब्धता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे देश जहाँ की जनसंख्या कुपोषण की शिकार है, वहाँ पोषण स्तर सुधार हेतु सूखी मटर उपयोगी साबित हो सकती है।